May 26, 2026 10:55 am

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आत्मबल बढ़ाता है शिव तांडव स्तोत्र का पाठ, जानें फायदे और विधि

क्रांति हैडलाइन, ब्यूरो : सनातन धर्म में भगवान शिव के अनेक भक्त हैं, इन भक्तों में से एक रावण भी थे, जिन्होंने शिव तांडव स्तोत्र की रचना की थी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, एक बार अहंकार में आकर रावण ने कैलाश पर्वत उठाने की कोशिश की, परंतु भगवान शिव ने उसे अपने अंगूठे से दबा दिया, जिसमें रावण के हाथ कैलाश पर्वत के नीचे दब गए। दर्द से कराहते रावण ने उसी समय भागवान शिव के लिए शिव तांडव स्तोत्र की रचना की, जिसमें 17 श्लोक हैं। इस शिव तांडव स्तोत्र को भगवान शिव के समक्ष गाया, जिससे भगवान भोलेनाथ प्रसन्न हो गए। भोपाल के रहने वाले ज्योतिषी पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा हमें बता रहे हैं शिव तांडव स्तोत्र के फायदे और विधि।
शिव तांडव स्त्रोत करने के फायदे
जो व्यक्ति नियमित रूप से शिव तांडव स्त्रोत का पाठ करता है, उसे कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।
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नियमित रूप से शिव तांडव स्त्रोत का पाठ करने से साधक का आत्मबल मजबूत होता है, चेहरा तेजमय होता साथ ही उत्कृष्ट व्यक्तित्व प्राप्त होता है।
शिव तांडव स्त्रोत करने से मनुष्य को वाणी की सिद्धि भी प्राप्त हो सकती है।
भगवान भोलेनाथ नृत्य, चित्रकला, लेखन, योग, ध्यान, समाधी सिद्धियों को प्रदान करने वाले देवता हैं, इसलिए शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से इन सभी विषयों में सफलता प्राप्त होती है।
तांडव स्त्रोत का पाठ करने से हिंदी की कुंडली में लगे कालसर्प दोष, शनि देव के कुप्रभाव पितृ दोष से छुटकारा मिलता है।

Kranti Headline
Author: Kranti Headline

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