
क्रांतिहैडलाइन :24 जून, शुक्रवार को आषाढ़ के कृष्ण पक्ष की एकादशी रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करने का विधान है। साथ ही इस दिन योगी राज श्रीकृष्ण, देवी तुलसी और भगवान शालग्राम की पूजा भी करना चाहिए। इस एकादशी व्रत के बारे में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था। ये पुण्य देने वाला व्रत है। इससे हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं। इस एकादशी पर बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण योग बनेगा। जिससे इस व्रत का शुभ फल और बढ़ जाएगा।
पुण्य देने वाला व्रत
पुरी के ज्योतिषाचार्य और धर्म ग्रंथों के जानकार डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत रखने से इसके प्रभाव से घर में सुख, शांति, समृद्धि आती है। अकेले योगिनी एकादशी का व्रत सैकड़ों ब्राह्मण भोजन और दान के समान ही फलदायी होता है। ये व्रत हर तरह पाप को नष्ट करने वाला व्रत है।
योगिनी एकादशी करने वालों को एक दिन पहले से ही व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें और एकादशी के दिन सुबह जल्दी नहाकर पूजा करें फिर से व्रत करने का संकल्प लें। दिनभर व्रत करें और एकादशी कथा पढ़कर उसके महत्व को समझना चाहिए। इसके बाद दान करें।
शुभ योगों में व्रत
24 जून, शुक्रवार को सुकर्म और सर्वार्थसिद्धि योग में एकादशी तिथि शुरू होगी। इन शुभ योगों में व्रत का संकल्प लेकर किए गए व्रत से कई गुना पुण्य फल मिलेगा। अश्विनी नक्षत्र में ये व्रत शुरू होने से शारीरिक कष्ट दूर होंगे। इस दिन बुध और शुक्र से लक्ष्मी नारायण योग भी बनेगा। इस शुभ योग में की गई विष्णु पूजा से लक्ष्मी जी भी प्रसन्न होंगी। जिससे ये सुख और समृद्धि बढ़ाने वाला व्रत रहेगा।
एकादशी पर नमक और आंवले का दान
शुक्रवार को योगिनी एकादशी पर नमक और आंवले का दान करने से महादान का पुण्य मिलता है। इस दिन छाता और जूते-चप्पल भी दान करना चाहिए। ग्रंथों के मुताबिक योगिनी एकादशी पर सूर्य को जल और जरुरतमंद लोगों को भोजन और कपड़ों का दान करना चाहिए। ऐसा करने से हर तरह के पाप खत्म होते हैं और परेशानियां दूर होने लगती हैं।





